Dr Bhimrao Ramji Ambedkar Heart touching Motivational Ancident
14 April 1891 ई में एक ऐसे powerful leader economist, politician, prolific writer, Human rights profounder का जन्म होता है जिसनें impossible को possible करके भारत का इतिहास बदल दिया इनका जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी नामक गावँ में हुआ बाद में ये सतारा में सिफ़्ट हो गये आज हम इनके लाइफ़ के कुछ ऐसे घटनाओं के बारे में आपको बताने वाला हूँ जिनको सुनकर आपका दिल दहल जायेगा और इसको पढ़ कर अगर आपके अंदर पढ़ने का जुनून, success होने की आग ना जागे तो मतलब आपके जीने का कोई मतलब नहीं आप अपने परिवार को धोखा दे रहे हो चलिये हम इनकी दुःखद और लोहे के चने चबाने जैसे जीवन के बारे में बातें करते हैं
(1)सबसे बड़ी समस्या इनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था जिसको घृढ़ा की नज़र से देखा जाता था इनका परिवार बहुत ग़रीब था
(2)एक बार कुछ लोग बॉम्बे मील में काम करने जा रहे थे तो इन्होंने ने भी जाने का dicision लिया लेकिन इनके पास पैसा नहीं था तो इन्होंने अपनी aunty के बटुए से पैसे चुराने का नृणय लिया 4 - 5 कोशिशों के बाद बटुवा हाथ लग ही गया लेकिन उसमे आधा आना निकला जो टिकट के लिय प्रायप्त नहीं था तब इन्होंने पढ़ने का decision लिया ताकि ये अपने घर और आने वाली पीढ़ियो की स्थिती बदल सकें
(3)इन्होंने एक बार कुएँ से पानी पिया लिया था उसके लिए इनको काफ़ी डाँट और पनिशमेंट भी मिला, इन्होंने अपने पिता जी से पढ़ने के लिये निवेदन किया काफी कोशिशों के बाद इनका एडमिसन एक नजदीकी स्कूल में कराया
(4) इनको क्लास के अंदर बैठने की अनुमति नहीं थी ये क्लास के बाहर बैठ कर पढ़ते थे , पानी पीने का अधिकार नहीं था poen इनको घड़े से पानी ऊपर करके पिलाता था ताकि पानी अपवित्र न हो जाये
(5) एक बार टीचर ने इनको क्लास में बुलाया एक प्रोब्लम सॉल्वे करने के लिये जैसे ही ये क्लास में आये सभी बच्चे इधर उधर भागने लगे और अपने अपने बैग ब्लैक बोर्ड के पास से हटाने लगे ताकि इनकी परछाई पड़ने न पाए और टिफ़िन अपवित्र न हो जाए
(6) एक बार ये स्कूल से पढ़कर वापस आ रहे थे रास्ते में बारिश होने लगी ये एक घर के पास दीवाल पर टेक लेकर खड़े हो गये उस घर से एक औरत निकली और इनको धक्के देकर भगा दी जिससे ये कीचड़ में जाकर गिर गये और इनका सारा कपड़ा और किताब बर्बाद हो गया
(7) एक बार ये एक रिक्शा पर बैठ कर कहीं जा रहे थे तो बीच रास्ते में रिक्शे वाले को पता चला की नीची जाति के हैं उसने इनको खूब डाँटा और डबल किराया लिया और इनसे रिक्शा भी चलवाया
ये आगे और पढ़ना चाहते थे पर इनके पास पैसे नहीं थे तब इनके पिता बड़ौदा के महाराजा के पास गये जिसने इनकी मदत की और इनकी पढ़ाई के लिये स्कोलरशिप दिलाया ये स्कोलरशिप लेकर बाम्बे पढ़ने चले गये वहाँ इन्होंने इंटर किया और इकोनॉमिक्स पालिटिक्स से BA किया
फिर आगे की पढ़ाई के लिये न्यूयार्क कोलंबिया युनिवर्सिटी चले गये जहाँ इन्होंने MA किया फिर ये रुके नहीं आगे की पढ़ाई के लिये लन्दन school ऑफ़ इकोनिम्क्स चले गये जहाँ एमएससी लॉ और Doctorate की डिग्री हासिल की
फिर ये वापस आये बड़ौदा के महाराजा के पास और कुछ सेवा करने का निवेदन किया तब महाराजा ने इन्हें मिलेट्री सिक्योरिटी की जॉब दे दी लेकिन इनके लिये समस्या ख़त्म नहीं हुआ था तब भी छुवाछूत कि समस्या थी चपरासी इनको फ़ाइल फ़ेक कर देता था
(8) कुछ दिन बाद इनकी शादी हो जाती है और इनके पाँच बच्चे थे but इक एक करके चार बच्चों का देहांत हो गया और कुछ दिन बाद इनकी पत्नी का भी देहान्त हो गया
दोस्तों जरा सोचिये इनकी लाईफ़ में कितनी परेशानी थी इनका पूरा घर परिवार ही उजड़ गया था इनकी एक समस्या ख़त्म होती थी तो दस आकर खड़ी हो जाती थी इनकी ज़िंदगी लोहे के चने चबाने के जैसी थी
आज के बच्चों और युवकों को थोड़ा सा प्रोब्लम हो जाये तो हज़ारो बहाने बनाने लगते हैं माँ बाप को कहते हैं आपने मेरे लिये कुछ नहीं किया जरा सोचिये इन्होंने अपनी ज़िंदगी में कितनी समस्याएँ झेली
अभी इनके बारे में लिखने को बहुत कुछ है अगर आप लोगों को यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसको शेयर करें लाइक करें और कमेण्ट करें ताकि मैं जल्द ही अगला पोस्ट राइट करूँ
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